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राजनीति

यूपी में वक्फ बोर्ड का महाघोटाला ? सरकारी रिकॉर्ड से 73,000 संपत्तियां गायब.........?

✍ Mamta Singh 📅 17 अगस्त 2026 👁 64 बार पढ़ा गया
यूपी में वक्फ बोर्ड का महाघोटाला ? सरकारी रिकॉर्ड से 73,000 संपत्तियां गायब.........?

उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से करीब 73,000 संपत्तियों के रिकॉर्ड गायब होने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस गंभीर गड़बड़ी के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की गई है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। केंद्रीय रिकॉर्ड और राज्य वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में एक बड़ा अंतर (Discrepancy) सामने आया है, जिसके मुताबिक राज्य में दर्ज 73,000 से अधिक वक्फ संपत्तियां अचानक सरकारी दस्तावेजों से गायब हो गई हैं। गायब हुई इन संपत्तियों की बाजार में कीमत करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

कैसे हुआ इस बड़े मामले का खुलासा?

·       केंद्र बनाम राज्य का आंकड़ा: केंद्र सरकार के डेटाबेस के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियां थीं।

·       रिकॉर्ड में भारी कमी: जब राज्य के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के वर्तमान डिजिटल व लिखित दस्तावेजों का मिलान किया गया, तो वहां सिर्फ 1,27,000 संपत्तियां ही दर्ज पाई गईं।

·       73,000 संपत्तियों का अता-पता नहीं: दोनों आंकड़ों के बीच का यह अंतर साफ करता है कि लगभग 73,000 संपत्तियों का पूरा हिसाब-किताब और मूल दस्तावेज रिकॉर्ड से पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं।

माफियाओं का कब्जा और अवैध कमर्शियल इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता Mohsin Raza ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा है। आरोपों के मुताबिक: पिछली सरकारों (सपा, बसपा) के कार्यकाल में वक्फ बोर्डों का सही तरीके से ऑडिट नहीं कराया गया।  ढिलाई का फायदा उठाकर वक्फ बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों, मुतवलियों (केयरटेकर) और भू-माफियाओं ने मिलकर इन संपत्तियों को अवैध रूप से बेच दिया या ट्रांसफर कर दिया। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या, बरेली, आगरा, प्रयागराज, अलीगढ़ और वाराणसी जैसे बड़े जिलों में इन गायब संपत्तियों पर मॉल, बड़े-बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और अवैध इमारतें तान दी गई हैं, जिससे निजी लोग मोटी कमाई कर रहे हैं।

कब्रें तक बेचने और ₹1000 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

इस बीच उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर (पूर्व नाम सैयद वसीम रिजवी) ने भी मुख्यमंत्री को एक हलफनामा सौंपा है। उन्होंने शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में 1000 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पैसे लेकर कब्रिस्तानों की जमीनों और कब्रों तक को अवैध रूप से बेच दिया गया। साथ ही कई गैर-वक्फ व हिंदुओं की संपत्तियों को भी फर्जी तरीके से वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज करने का खेल खेला गया।

योगी सरकार का कड़ा रुख: SIT जांच की मांग

पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा ने इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) या सीबीआई (CBI) से जांच कराने और राज्यभर में वक्फ संपत्तियों का नए सिरे से जिलावार ऑडिट व मिलान कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित और गहन जांच का आश्वासन दिया है, जिससे आने वाले दिनों में वक्फ बोर्ड से जुड़े कई बड़े चेहरों और भू-माफियाओं पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है

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