1 साल से अधिक, 2 साल तक की देरी
यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल बीतने के बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो अब केवल रजिस्ट्रार के स्तर पर पंजीकरण नहीं होगा। इसके लिए जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।
संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की वास्तविकता और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करने के बाद आदेश जारी करेंगे। निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा।
दो साल से अधिक पुराना मामला तो कोर्ट का आदेश जरूरी
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उन मामलों के लिए है जिनमें जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो साल से अधिक समय बाद दी जाती है। ऐसे मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही पंजीकरण कराया जा सकेगा।
मजिस्ट्रेट भी जन्म या मृत्यु से संबंधित तथ्यों की सत्यता की जांच करेंगे और निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी।
पहले क्या व्यवस्था थी?
2023 में किए गए संशोधन के बाद एक साल से अधिक देरी वाले पंजीकरण के लिए DM, SDM अथवा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की व्यवस्था की गई थी। 2026 के संशोधन ने इसे दो स्तरों में स्पष्ट किया है—एक से दो साल तक कार्यपालक स्तर पर आदेश और दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश।
नए नियमों को ऐसे समझें
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देरी |
अब किसकी अनुमति जरूरी |
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सामान्य समय-सीमा के भीतर |
संबंधित रजिस्ट्रार के माध्यम से पंजीकरण |
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1 साल से अधिक, 2 साल तक |
DM/SDM/अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश |
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2 साल से अधिक |
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश |
कानून लागू होने की तारीख
संसद ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 को अगस्त 2026 में पारित किया। राष्ट्रपति की मंजूरी 6 अगस्त 2026 को मिली और केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार संशोधित प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुए।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
जन्म प्रमाणपत्र स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं तथा कई अन्य आधिकारिक कामों में महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसी तरह मृत्यु का पंजीकरण संपत्ति, उत्तराधिकार, बीमा और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आवश्यक हो सकता है। इसलिए जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज कराना सबसे सरल प्रक्रिया रहेगी। देरी बढ़ने के साथ सत्यापन और सक्षम अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता बढ़ती जाएगी।
खास बात: नए कानून का उद्देश्य देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और जन्म-मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना है। एक से दो वर्ष की देरी वाले मामलों को कार्यपालक स्तर पर तथा दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों को न्यायिक स्तर पर सत्यापन से जोड़ दिया गया है।
