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विदेश

प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही थीं,अंतिम क्षणों में ढाका ने हाथ पीछे खींच लिए

✍ Mamta Singh 📅 24 अगस्त 2026 👁 29 बार पढ़ा गया
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही थीं,अंतिम क्षणों में ढाका ने हाथ पीछे खींच लिए

बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान का भारत दौरा ऐन वक्त पर रद्द होने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। इस गतिरोध के पीछे शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, चीन का बढ़ता दखल और सुरक्षा संबंधी चिंताएं मुख्य वजहें बनकर उभरी हैं। वहीं, भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'सिक्किम-सिलीगुड़ी' चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है।

पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण : ऐन वक्त पर दौरा रद्द होने का कारण

तैयारियां धरी की धरी रहीं: भारत और बांग्लादेश दोनों ही तरफ प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही थीं। लेकिन अंतिम क्षणों में ढाका ने हाथ पीछे खींच लिए। विदेश मामलों के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि ढाका के मौजूदा प्रशासनिक तंत्र द्वारा बिना किसी ठोस आधार के 'खतरों और सुरक्षा' की आशंका जताना इस गतिरोध की सबसे बड़ी वजह है।

'इस्लामिक नाटो' की चर्चा और शेख हसीना का विवाद

शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही ढाका लगातार भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने से वर्तमान बांग्लादेशी सरकार नाराज है। क्षेत्र में एक नए 'इस्लामिक नाटो' के गठन की चर्चाओं ने भी नई दिल्ली को सतर्क कर दिया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में अविश्वास की खाई और चौड़ी हुई है। भारत आने से पहले पीएम तारिक रहमान का बीजिंग दौरा और वहां चीन के साथ करीबी बढ़ाना नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है। बांग्लादेश ने तीस्ता नदी जल-बंटवारा परियोजना के प्रबंधन के लिए चीन से हाथ मिलाया है, जिसे भारत अपनी रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती मान रहा है।

बांग्लादेश का आंतरिक कट्टरपंथ

कट्टरपंथ का उभार: बांग्लादेश के भीतर आंतरिक कट्टरपंथ और भारत-विरोधी तत्वों का तेजी से उभार हुआ है।

अल्पसंख्यकों की असुरक्षा: देश के भीतर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने और चरमपंथी विचारधारा के हावी होने से भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पा रहा है। बांग्लादेश में अस्थिरता और चीनी दखल को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सामरिक सुरक्षा बढ़ा दी है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर नजर

पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले बेहद संवेदनशील 'सिक्किम-सिलीगुड़ी' चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा रहा है ताकि किसी भी बाहरी खतरे या घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

खींच लिए। विदेश मामलों के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि ढाका के मौजूदा प्रशासनिक तंत्र द्वारा बिना किसी ठोस आधार के 'खतरों और सुरक्षा' की आशंका जताना इस गतिरोध की सबसे बड़ी वजह है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही ढाका लगातार भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने से वर्तमान बांग्लादेशी सरकार नाराज है। इस्लामिक नाटो की सुगबुगाहट: क्षेत्र में एक नए 'इस्लामिक नाटो' के गठन की चर्चाओं ने भी नई दिल्ली को सतर्क कर दिया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में अविश्वास की खाई और चौड़ी हुई है।

 

 

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