नई दिल्ली : देश में जारी मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई बेहद तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया और मतदाता सूची में नामों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि आखिर संदिग्ध मतदाताओं को बिना किसी जांच के मतदान का अधिकार देकर कांग्रेस किसे फायदा पहुंचाना चाहती है?
बीजेपी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी के मुख्य आरोप और तर्क:
भाजपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान त्रिवेदी ने कहा कि जांच में 5.8 करोड़ फर्जी राशन कार्ड और 4.45 करोड़ मनरेगा के फर्जी लाभार्थी पाए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कल्याणकारी योजनाओं में इतने फर्जी नाम मिल सकते हैं, तो वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की संभावना से इंकार क्यों किया जा रहा है। भाजपा के अनुसार SIR प्रक्रिया के तहत हटाए या चिह्नित किए गए नामों में 2.8 करोड़ मृत, 6.3 करोड़ स्थानांतरित, 1 करोड़ डुप्लीकेट और 3 करोड़ अनुपस्थित लोग शामिल हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन (INDIA bloc) का रुख:
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस और अन्य दलों ने मार्च निकालकर चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया को रोकने और डिजिटल सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। विपक्ष का मानना है कि इससे कमजोर व अल्पसंख्यक वर्ग के लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
यह विवाद पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया बनाम वैध मतदाताओं के अधिकारों की बहस बन गया है। भाजपा इसे फर्जी वोट रोकने का कदम मानती है, जबकि कांग्रेस इसे मतदाताओं को बाहर करने की साजिश बताती है।
