उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक अहम कैबिनेट बैठक में 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इनमें सबसे बड़ी घोषणा 74.3 किलोमीटर लंबे जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़ी है। इस फैसले से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, वहीं हजारों किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं पूरी खबर।
74.3 किलोमीटर लंबा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे
योगी सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले 74.3 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण और परियोजना को आगे बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए पहले ही भूमि अधिग्रहण हेतु करीब 1,204 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4,000 करोड़ रुपये है।
क्या होगा फायदा?
यह एक्सप्रेसवे सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
इससे—
- दिल्ली-एनसीआर से जेवर एयरपोर्ट तक यात्रा और आसान होगी।
- मेरठ, बुलंदशहर, प्रयागराज और पश्चिमी यूपी के कई शहरों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
- माल ढुलाई तेज होगी।
- उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
- एयरपोर्ट तक पहुंचने में समय की बचत होगी।
56 गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह परियोजना गौतमबुद्ध नगर के 8 गांवों और बुलंदशहर के 48 गांवों सहित कुल 56 गांवों से होकर गुजरेगी।
लगभग 740 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। प्रभावित किसानों को सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।
किसानों को कैसे मिलेगी राहत?
सरकार का कहना है कि—
- किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा मिलेगा।
- भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
- सड़क बनने के बाद आसपास की जमीनों की कीमत बढ़ने की संभावना है।
- क्षेत्र में उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कैबिनेट बैठक में 21 प्रस्तावों पर मुहर
कैबिनेट बैठक में केवल एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि कई अन्य विकास और प्रशासनिक प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें आधारभूत ढांचे, विकास कार्यों और विभिन्न विभागों से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं, जिनका उद्देश्य प्रदेश में निवेश बढ़ाना और विकास परियोजनाओं को गति देना है।
प्रदेश को मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद—
- जेवर एयरपोर्ट की उपयोगिता और बढ़ेगी।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित होगा।
- औद्योगिक निवेश आकर्षित होगा।
- पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, योगी सरकार के इस फैसले को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह परियोजना लाखों लोगों की यात्रा आसान करेगी और किसानों के लिए भी नए अवसर लेकर आएगी।
